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कमीशन का खेल: पब्लिशर्स, विक्रेता और स्कूल संचालक मिलकर लूट रहे पालकों को
दूसरी दुकान से कॉपी खरीदी, सेंटमैरी ने रिजेक्ट की
कमीशन के लिए सीबीएसई स्कूल संचालक, पब्लिशर्स व बुक विक्रेताओं ने ऐसा काकस बनाया कि पालक फंस कर रह गए। स्कूल संचालक अब तक कोर्स में तो मनमर्जी चला ही रहे थे, कॉपियों के लिए भी नियम बना दिए। अब ऐसा ही एक मामला सेंटमैरी स्कूल का सामने है।
यहां शिक्षिका ने एक विद्यार्थी की कॉपियां तय पेज की नहीं होना बताते हुए खारिज कर दी। सूत्रों के अनुसार सेंटमैरी स्कूल में चौथी के एक छात्र के परिजनों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि शिक्षिका ने कोर्स के लिए नोट बुक लिखी पर्ची देकर एमपी पब्लिशर्स पर ही मिलने का बताया।
काफी महंगा होने पर भी कोर्स की 15 किताब खरीदना पड़ी। वहीं २५ कॉपियां दूसरी दुकान से ले ली। मैडम ने कॉपियां उनके अनुसार नहीं बताते हुए नकार दिया। मजबूरी में फिर तलाशकर एक दुकान से 20 कांपियां खरीद ली तो एमपी पब्लिशर्स ने शेष बची पांच कॉपियां देने से इंकार कर दिया। याद रहे स्कूलों ने कापियों के लिए लाइन, पेज व साइज तक तय कर दी है।
स्कूलों को दो तरफा फायदा
सूत्रों के अनुसार कथित पब्लिशर्स स्कूल संचालक से सेटिंग कर उनकी किताबों पर 50 फीसदी तक कमीशन देते हंै। वहीं जो विक्रेता भी 55 फीसदी तक कमीशन देने के लिए राजी होता है संचालक पब्लिशर्स को उसी के यहां से कोर्स बिकवाने की बात करते हैं।
नतीजतन 50 रुपए की किताब ढाई सौ तक में बिकती है। दोनों तरफ से कमीशन के लिए संचालक पालकों को पर्ची पकड़ा देते है। इसीलिए नामी स्कूलों का कोर्स एमपी पब्लिशर्स, ज्ञान गंगा जैसी तय दुकानों पर ही मिलता है।
प्रशासन की नौटंकी
रिजल्ट के समय ही स्कूलोंं में कोर्स की पर्ची दे दी जाती है। परिजन बच्चे आगे की क्लास की तैयारी शुरू कर दे इसीलिए तुरंत कोर्स खरीद लेते हैं। शिक्षा विभाग व प्रशासन के जिम्मेदार जानकारी के बावजूद चुप रहते हैं।
अब नया सत्र शुरू होते समय कार्रवाई की खानापूर्ति कर रहे है, जबकि अब तक 80 फीसदी से ज्यादा पालक कोर्स खरीद चुके होते हैं। यही नहीं मामला सुर्खियों में होने पर भी संचालक व विक्रेताओं को खोखली धमकी दे रहे हैं।